30.06.2026 : राज्यपालांच्या हस्ते अटल बिहारी वाजपेयी यांच्यावरील ‘अटल संस्मरण’चे प्रकाशन संपन्न
राज्यपालांच्या हस्ते अटल बिहारी वाजपेयी यांच्यावरील ‘अटल संस्मरण’चे प्रकाशन संपन्न
नेतृत्वगुण शिकायचे असतील तर अटलजींचे जीवन अभ्यासावे: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा
अटल बिहारी वाजपेयी यांच्या व्यक्तिमत्वामुळे प्रेरित होऊन आपण राजकारणात आलो. भावी पिढ्यांना नेतृत्वगुण, राजकारणातील शालीनता व नीतिमत्ता शिकायची असेल तर त्यांनी अटल बिहारी वाजपेयी यांचे सार्वजनिक जीवन अभ्यासावे, असे प्रतिपादन राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा यांनी आज येथे केले.
वाजपेयी यांच्या राजकारण तसेच सार्वजनिक जीवनासंबंधी आठवणींचे संकलन असलेल्या ‘अटल संस्मरण’ या ग्रंथाचे प्रकाशन राज्यपालांच्या मुख्य उपस्थितीत मंगळवारी (दि. ३०) महाराष्ट्र लोकभवन, मुंबई येथे झाले, त्यावेळी ते बोलत होते. पंतप्रधान अटल बिहारी वाजपेयी यांचे माध्यम सल्लागार म्हणून कार्य केलेल्या अशोक टंडन यांनी हे पुस्तक लिहिले असून वाजपेयी यांच्या जन्मशताब्दी वर्षानिमित्त ते प्रकाशित करण्यात आले आहे.
नेता कसा असावा, विरोधी पक्षनेता कसा असावा याचे अटलजी मूर्तिमंत उदाहरण होते असे सांगून अटल बिहारी वाजपेयी उत्कृष्ट वक्ते होते व थोर विचारवंत होते असे राज्यपालांनी सांगितले.
उत्तरपूर्वेकडील राज्यात कठीण परिस्थितीत पक्षाचे काम करीत असताना अटलजी आमच्यासारख्या कार्यकर्त्यांना प्रेरणा देत. भेटीस गेल्यास उत्तरपूर्वेकडील नेत्यांना अगोदर भेटत. विरोधी पक्षात असताना अटलजी जसे होते तसेच ते पंतप्रधान झाल्यावर देखील होते असे राज्यपालांनी सांगितले. तेरा दिवसांचे सरकार संकटात असताना देखील त्यांनी वैचारिक बांधिलकी सोडली नाही.
संसदेचे अध्यक्ष सोमनाथ चॅटर्जी यांनी अटलजींना एकदा ‘आपण नेहमी म्हणता त्या ‘भारतीयतेची’ व्याख्या काय आहे असे विचारले होते. त्यावर अटलजींनी ‘आपण बंगाल मधील असून देखील आपले नाम ‘सोमनाथ’ हे पश्चिमेकडील आहे, हीच भारतीयता आहे’, असे सांगितल्याचे राज्यपालांनी नमूद केले.
आज सर्वत्र नैतिकतेचा ऱ्हास होत असल्याचे नमूद करून कृत्रिम बुद्धिमत्ता असो किंवा अणुऊर्जा असो, वापर करणाऱ्याकडे नीतिमत्ता व मूल्ये असली पाहिजे असे राज्यपालांनी सांगितले. आजकाल लोकांना कमी वेळात नेता व्हायचे असते. अटलजींनी राजकारणात कधीही ‘शॉर्टकट’ स्वीकारला नाही, असे राज्यपालांनी सांगितले.
‘अटल संस्मरण प्रेरणादायी, अंतर्मुख करणारे’: आशिष शेलार
यावेळी बोलताना सांस्कृतिक कार्य व माहिती तंत्रज्ञान मंत्री आशिष शेलार यांनी ‘अटल संस्मरण’ हा उच्च साहित्यिक मूल्य असलेला अटलजींच्या जीवनावरील महत्वपूर्ण दस्तावेज असल्याचे सांगितले. लेखक अशोक टंडन यांनी अनेक वर्षे अटलजींसोबत काम केले असल्यामुळे त्यांचे पुस्तक वस्तुनिष्ठ, प्रेरणादायी व अंतर्मुख करणारे झाले आहे असे शेलार यांनी सांगितले.
अटलजींचे जीवन संघर्षमय होते. ते अमोघ वक्ते व सुसंस्कृत राजकारणी होते. लोकशाही हे संवादाचे माध्यम आहे हे त्यांनी दाखवून दिले. सहमतीने राजकारण हीच त्यांची शिकवण आहे असे शेलार यांनी सांगितले.
अतिशय प्रतिकूल परिस्थितीत अटलजींचे राजकीय जीवन गेले. परंतु त्यांच्या आचार विचारात कोठेही कटुता नव्हती. कवी हृदय व मेणासारखे मऊ असणारे अटलजी प्रसंगी वज्रासारखे कठीण होत असे शेलार यांनी सांगितले. अटलजींनी देशाला अणुऊर्जा संपन्न केल्यावर अनेक देशांनी भारतावर निर्बंध लादले तरी देखील ते डगमगले नाही, असे त्यांनी सांगितले.
आपण अटलजींसोबत सहा वर्षे काम केले व पंतप्रधान पदावरून निवृत्त झाल्यावर देखील त्यांच्या संपर्कात होतो असे सांगून लेखक अशोक टंडन यांनी अटलजींचे १३ दिवसांचे सरकार कसे बनले तसेच कम्युनिस्टांनी त्याकाळात कसे राजकारण यासंबंधी किस्से सांगितले. जन्मशताब्दी वर्षानिमित्त हे पुस्तक काढले असून ती वाजपेयी यांना श्रद्धांजली असल्याचे त्यांनी सांगितले. कार्यक्रमाला गायक अनुप जलोटा, रवींद्र संघवी, बिनॉय बी. यांसह विविध क्षेत्रातील मान्यवर उपस्थित होते.
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राज्यपाल के करकमलों से ‘अटल संस्मरण’ पुस्तक का लोकार्पण
“नेतृत्व के गुण सीखने हों तो अटल जी के जीवन का अध्ययन करें” राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा
मुंबई, 30 जून : महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन भावी पीढ़ियों के लिए नेतृत्व, लोकतांत्रिक मर्यादा और नैतिक राजनीति का अनुपम आदर्श है। यदि युवाओं को नेतृत्व के गुण, राजनीति में शालीनता और सार्वजनिक जीवन में मूल्यों का महत्व समझना है, तो उन्हें अटल जी के जीवन का गंभीर अध्ययन करना चाहिए।
राज्यपाल आज मुंबई स्थित महाराष्ट्र लोकभवन में आयोजित समारोह में अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक एवं सार्वजनिक जीवन से जुड़ी स्मृतियों पर आधारित पुस्तक ‘अटल संस्मरण’ के लोकार्पण अवसर पर संबोधित कर रहे थे। यह पुस्तक पूर्व प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार रहे अशोक टंडन द्वारा लिखी गई है तथा अटल जी की जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में प्रकाशित की गई है।
राज्यपाल ने कहा कि वे स्वयं अटल जी के व्यक्तित्व और विचारों से प्रेरित होकर सार्वजनिक जीवन एवं राजनीति में आए। उन्होंने कहा कि अटल जी केवल एक सफल प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि आदर्श विपक्ष के नेता, विलक्षण वक्ता, दूरदर्शी चिंतक और उच्च लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक थे।
अपने अनुभव साझा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तर-पूर्व के राज्यों में अत्यंत कठिन परिस्थितियों में संगठन का कार्य करते समय अटल जी हम जैसे कार्यकर्ताओं के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत थे। उनसे मिलने जाने पर वे सदैव उत्तर-पूर्व के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देते थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए अटल जी जैसे थे, प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वैसे ही बने रहे। तेरह दिन की सरकार संकट में होने पर भी उन्होंने अपने सिद्धांतों और वैचारिक प्रतिबद्धता से कभी समझौता नहीं किया।
राज्यपाल ने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि एक बार लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने अटल जी से पूछा कि वे जिस “भारतीयता” की बात करते हैं, उसका अर्थ क्या है। इस पर अटल जी ने मुस्कराते हुए कहा था, “आप बंगाल से हैं, लेकिन आपका नाम ‘सोमनाथ’ पश्चिम भारत के प्रसिद्ध तीर्थ से जुड़ा है—यही भारतीयता है।” राज्यपाल ने कहा कि यह उत्तर भारत की सांस्कृतिक एकात्मता और विविधता में एकता का सशक्त उदाहरण है।
राज्यपाल ने वर्तमान समय में सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों के क्षरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चाहे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हो अथवा परमाणु ऊर्जा, किसी भी शक्ति का सदुपयोग तभी संभव है जब उसका उपयोग करने वाले व्यक्ति के पास नैतिकता और जीवन-मूल्य हों। उन्होंने कहा कि आज अनेक लोग शीघ्र सफलता और नेतृत्व प्राप्त करना चाहते हैं, किंतु अटल जी ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी भी शॉर्टकट का सहारा नहीं लिया।
‘अटल संस्मरण’ प्रेरणादायी और आत्ममंथन कराने वाला ग्रंथ — आशिष शेलार
इस अवसर पर महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री आशिष शेलार ने कहा कि ‘अटल संस्मरण’ उच्च साहित्यिक गुणवत्ता वाला ऐसा महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और जीवन-दर्शन को निकट से समझने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि लेखक अशोक टंडन ने कई वर्षों तक अटल जी के साथ कार्य किया है, इसलिए पुस्तक तथ्यपरक, प्रेरणादायी और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करने वाली बन पड़ी है।
शेलार ने कहा कि अटल जी का सार्वजनिक जीवन संघर्षों से भरा रहा, किंतु उनके विचारों और व्यवहार में कभी कटुता नहीं आई। वे अद्भुत वक्ता, सुसंस्कृत राजनेता तथा लोकतांत्रिक संवाद के सशक्त समर्थक थे। सहमति और संवाद के माध्यम से राजनीति करना ही उनका मूल मंत्र था।
उन्होंने कहा कि अटल जी का हृदय कवि जैसा संवेदनशील था, किंतु राष्ट्रहित के प्रश्न पर वे वज्र के समान दृढ़ हो जाते थे। भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने के बाद अनेक देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद उन्होंने अद्भुत धैर्य और दृढ़ता का परिचय दिया।
लेखक अशोक टंडन ने अपने संबोधन में बताया कि उन्हें अटल जी के साथ छह वर्षों तक निकटता से कार्य करने का अवसर मिला तथा प्रधानमंत्री पद से निवृत्त होने के बाद भी उनका संपर्क बना रहा। उन्होंने अटल जी की तेरह दिन की सरकार के गठन तथा उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े अनेक संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि जन्मशती वर्ष के अवसर पर प्रकाशित यह पुस्तक अटल जी के प्रति उनकी विनम्र श्रद्धांजलि है।
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा, रवींद्र संघवी, बिनॉय बी. सहित साहित्य, संस्कृति, मीडिया और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।