14.04.2026: राज्यपालांच्या हस्ते अग्निशमन सेवा सप्ताहाचे उदघाटन
राज्यपालांच्या हस्ते अग्निशमन सेवा सप्ताहाचे उदघाटन
मुंबईतील १२ अग्निशमन अधिकारी, जवानांना राष्ट्रपती पदके प्रदान
राष्ट्रीय अग्निशमन दिनानिमित्त आज राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा यांच्या प्रमुख उपस्थितीत लोकभवन मुंबई येथे अग्निशमन सेवा सप्ताहाचा शुभारंभ करण्यात आला. यावेळी मुंबई अग्निशमन दल, एमआयडीसी व महाराष्ट्र अग्निशमन सेवेतील १२ अग्निशमन अधिकारी व कर्मचाऱ्यांना राज्यपालांच्या हस्ते अग्निशमन सेवेकरिता जाहीर झालेले राष्ट्रपती पदक समारंभपूर्वक प्रदान करण्यात आले.
गेल्या काही दशकांत अग्निशमन दलासमोरील आव्हाने अनेक पटींनी वाढली आहेत. नागरीकरण, उंच इमारती, भूमिगत व भुयारी मेट्रो, तसेच वाढते औद्योगिक क्षेत्र यामुळे आपत्कालीन परिस्थितीचे स्वरूप गुंतागुंतीचे झाले आहे. मोठाली गोदामे आणि डेटा सेंटर्स ही काळाची गरज झाली आहेत. त्यामुळे औद्योगिक आगींपासून ते अत्याधुनिक डेटा सेंटर्स संबंधित आगीपर्यंत विविध प्रकारच्या आव्हानांना अग्निशमन दलांना सामोरे जावे लागत आहे, असे राज्यपालांनी सांगितले.
अग्निशमन सेवा केवळ आग विझविण्यापुरती मर्यादित राहिलेली नसून महत्त्वपूर्ण पायाभूत सुविधा, औद्योगिक संपत्ती आणि सार्वजनिक ठिकाणांचे संरक्षण करणे ही देखील तिची जबाबदारी झाली आहे, असे ते म्हणाले.
अलीकडच्या काळात गॅस व रासायनिक आगी, तसेच ई-कार्स आणि इतर विद्युत उपकरणांमधील लिथियम-आयन बॅटरीमुळे आगींच्या घटना घडल्या आहेत. आग प्रतिबंध, शोध आणि कारणांचे विश्लेषण आदी क्षेत्रांत कृत्रिम बुद्धिमत्तेचा प्रभावी वापर करणे अत्यावश्यक आहे, असे राज्यपालांनी सांगितले. बदलत्या परिस्थितीत अग्निशमन सेवेतील अधिकारी कर्मचाऱ्यांचे कौशल्य वर्धन, प्रशिक्षण आणि पायाभूत सुविधा सातत्याने अद्ययावत करणे गरजेचे आहे, असे त्यांनी सांगितले.
महाराष्ट्रात अग्निशमन सेवांच्या आधुनिकीकरणासाठी १५व्या वित्त आयोगांतर्गत ६१४ कोटी रुपयांचा निधी मंजूर करण्यात आला आहे, असे सांगून हा निधी शहरी तसेच ग्रामीण भागात प्रभावी अग्निसुरक्षा सेवा पुरविण्यास निश्चितच मदत करेल, असे राज्यपालांनी सांगितले.
महाराष्ट्रात अग्निविज्ञान क्षेत्रातील संशोधनासाठी स्वतंत्र संस्थेची स्थापना करणे अथवा विद्यमान संस्थांचे बळकटीकरण करणे आवश्यक आहे. यामध्ये आग नियंत्रणासाठी नाविन्यपूर्ण तंत्रज्ञानाचा शोध, पर्यावरणपूरक अग्निशामक साधनांचा विकास आणि औद्योगिक व बिगरऔद्योगिक आस्थापनांचे सर्वंकष अग्निसुरक्षा ऑडिट यांचा समावेश असावा, असे राज्यपालांनी सांगितले. याशिवाय, विद्यापीठे व शैक्षणिक संस्थांना अग्निसुरक्षा सराव, जनजागृती मोहिमा आणि आपत्ती व्यवस्थापन उपक्रमांमध्ये सक्रियपणे सहभागी करून घेणेही तितकेच महत्त्वाचे आहे, असे त्यांनी सांगितले.
यावेळी राज्यपालांच्या हस्ते मुख्य अग्निशमन अधिकारी, एमआयडीसी संतोष वारिक, मुंबई अग्निशमन दलाचे उपमुख्य अग्निशमन अधिकारी अनिल परब, मुंबई अग्निशमन दलाचे उपमुख्य अग्निशमन अधिकारी हरिश्चंद्र रघु शेट्टी, विभागीय अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र पाटील, सब ऑफिसर राजाराम कुदळे, सब ऑफिसर अनंत धोत्रे, लिडींग फायरमन किशोर म्हात्रे, लिडींग फायरमन मुरलीधर आंधळे, लिडींग फायरमन मोहन तोसकर, लिडींग फायरमन मुकेश काटे, विभागीय अग्निशमन अधिकारी किशोर घाडीगावकर व वरिष्ठ प्रशिक्षक किरण हत्याळ यांना राष्ट्रपती पदक प्रदान करण्यात आले.
सुरुवातीला महाराष्ट्र अग्निशमन सेवा संचालक संतोष वारिक यांनी राज्यपालांच्या जॅकेटला अग्निशमन ध्वजाचे स्टॅम्प तिकीट लावले. राज्यपालांनी अग्निशमन सेवा कर्मचारी कल्याण निधीला आपले योगदान दिले तसेच जनतेला निधीसाठी अधिकाधिक योगदान देण्याचे आवाहन केले.
संचालक संतोष वारिक यांनी प्रास्ताविक केले तर मुंबई अग्निशमन दलाचे मुख्य अग्निशमन अधिकारी रवींद्र आंबुलगेकर यांनी आभार प्रदर्शन केले.
कार्यक्रमाला मुंबई अग्निशमन दल, औद्योगिक आस्थापना तसेच महाराष्ट्र अग्निशमन सेवेतील वरिष्ठ अग्निशमन अधिकारी व पुरस्कारप्राप्त अधिकाऱ्यांचे कुटुंबीय उपस्थित होते.
मुंबई डॉकयार्ड येथे सन १९४४ साली झालेल्या जहाजावरील स्फोटात प्राण गमावलेल्या अग्निशमन अधिकारी व जवानांच्या स्मरणार्थ १४ एप्रिल हा दिवस राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस पाळला जातो तसेच या दिवसापासून अग्निशमन सप्ताह पाळल्या जातो.
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राज्यपाल के हाथों अग्निशमन सेवा सप्ताह का उद्घाटन
‘मुंबई के 12 अग्निशमन अधिकारियों एवं जवानों को राष्ट्रपति पदक प्रदान
राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस के अवसर पर आज राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा की प्रमुख उपस्थिति में मुंबई स्थित लोकभवन में अग्निशमन सेवा सप्ताह का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मुंबई अग्निशमन दल, एमआईडीसी तथा महाराष्ट्र अग्निशमन सेवा के 12 अग्निशमन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अग्निशमन सेवा के लिए घोषित राष्ट्रपति पदक राज्यपाल के हाथों समारोहपूर्वक प्रदान किए गए।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कुछ दशकों में अग्निशमन सेवाओं के समक्ष चुनौतियाँ कई गुना बढ़ गई हैं। तीव्र शहरीकरण, ऊँची इमारतें, भूमिगत एवं एलिवेटेड मेट्रो नेटवर्क तथा तेजी से विकसित होते औद्योगिक क्षेत्र के कारण आपात स्थितियों का स्वरूप अधिक जटिल हो गया है। बड़े-बड़े गोदाम और डेटा सेंटर आज की आवश्यकता बन गए हैं, जिसके चलते साधारण औद्योगिक आग से लेकर अत्याधुनिक डेटा सेंटर से जुड़ी आग तक विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि आज अग्निशमन सेवा केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे, औद्योगिक परिसंपत्तियों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभा रही है। हाल के समय में गैस एवं रासायनिक आग तथा ई-कारों और अन्य विद्युत उपकरणों में प्रयुक्त लिथियम-आयन बैटरियों से संबंधित आग की घटनाएँ सामने आई हैं। ऐसे में आग की रोकथाम, पहचान और कारणों के विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) का प्रभावी उपयोग आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि बदलते परिदृश्य में अग्निशमन सेवा के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण और बुनियादी ढाँचे का निरंतर आधुनिकीकरण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में अग्निशमन सेवाओं के आधुनिकीकरण हेतु 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत 614 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में प्रभावी अग्नि सुरक्षा सेवाएँ उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगी।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य में अग्नि विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान हेतु एक समर्पित संस्थान की स्थापना अथवा वर्तमान संस्थानों को सशक्त करना आवश्यक है। इसमें आग नियंत्रण के लिए नवीन तकनीकों का विकास, पर्यावरण अनुकूल अग्निशामक साधनों का निर्माण तथा औद्योगिक एवं गैर-औद्योगिक प्रतिष्ठानों का व्यापक अग्नि सुरक्षा ऑडिट शामिल होना चाहिए। साथ ही, विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को अग्नि सुरक्षा अभ्यास, जनजागरूकता अभियान और आपदा प्रबंधन गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी, एमआईडीसी संतोष वारिक, मुंबई अग्निशमन दल के उप मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनिल परब एवं हरिश्चंद्र रघु शेट्टी, विभागीय अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र पाटील, सब ऑफिसर राजाराम कुदळे एवं अनंत धोत्रे, लीडिंग फायरमैन किशोर म्हात्रे, मुरलीधर आंधळे, मोहन तोसकर, मुकेश काटे, विभागीय अग्निशमन अधिकारी किशोर घाडीगावकर तथा वरिष्ठ प्रशिक्षक किरण हत्याळ को राष्ट्रपति पदक प्रदान किए गए।
कार्यक्रम की शुरुआत में महाराष्ट्र अग्निशमन सेवा के संचालक संतोष वारिक ने राज्यपाल के जैकेट पर अग्निशमन ध्वज का स्टैम्प बैज लगाया। राज्यपाल ने अग्निशमन सेवा कर्मचारी कल्याण निधि में अपना योगदान दिया और नागरिकों से भी अधिकाधिक सहयोग देने का आह्वान किया।
संचालक संतोष वारिक ने प्रास्ताविक प्रस्तुत किया, जबकि मुंबई अग्निशमन दल के मुख्य अग्निशमन अधिकारी रवींद्र आंबुलगेकर ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मुंबई अग्निशमन दल, औद्योगिक प्रतिष्ठानों के अधिकारी तथा पुरस्कार प्राप्त अधिकारियों के परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि 14 अप्रैल को राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन वर्ष 1944 में मुंबई डॉकयार्ड में जहाज पर हुए विस्फोट में शहीद हुए अग्निशमन अधिकारियों और जवानों की स्मृति में मनाया जाता है। इसी दिन से अग्निशमन सेवा सप्ताह की शुरुआत भी होती है।
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