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    15.11.2023 : आदिवासी विकास विभाग द्वारा आयोजित जनजातीय गौरव दिवस तथा राज्यस्तरीय आदिवासी संस्कृति महोत्सव

    Publish Date: November 15, 2023

    आदिवासी विकास विभाग द्वारा आयोजित जनजातीय गौरव दिवस तथा राज्यस्तरीय आदिवासी संस्कृति महोत्सव। स्थान: जिला स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नंदुरबार। १५ नवंबर २०२३

    श्री एकनाथ शिंदे, मुख्यमंत्री

    डॉ विजय कुमार गावित, आदिवासी विकास मंत्री,

    श्री अनिल पाटील, पालक मंत्री, नंदुरबार

    श्रीमती हीना गावित, सांसद

    डॉ. सुप्रिया पाटील, अध्यक्ष, जिला परिषद

    श्री विजय वाघमारे, सचिव, आदिवासी विकास विभाग

    श्री राधाकृष्ण गवित, डिवीजनल कमिश्नर, नाशिक

    सबसे पहले मैं जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

    महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी नेता अमर शहीद भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर मै उन्हे कोटी कोटी नमन करता हूं।

    मुझे ख़ुशी है कि, प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी जे के नेतृत्व में स्वतंत्रता के बाद पहली बार स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदायों के योगदान को मनाने और प्रेरित करने के लिए 15 नवंबर को जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया है।

    आज 15 नवंबर को पूरे देश में जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 15 नवंबर से 26 नवंबर तक जनजाति गौरव दिवस और जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव मनाने का निर्णय लिया है। आज प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी जनजातीय विकास की अनेक योजनाओं का शुभारंभ कर रहे है।

    आज यहां आदिवासी हस्तकला प्रदर्शनी का आयोजन करने के लिये, तथा आदिवासी पारंपारिक नृत्य स्पर्धा का आयोजन करने के लिये मै आदिवासी विकास विभाग को बधाई देता हुं।

    हमारे महान राष्ट्र के इतिहास में, हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों ने महाराष्ट्र की प्रकृति और संसाधनों को संरक्षित करने में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

    हमारे आदिवासी भाई-बहन हमारे स्वतंत्रता आंदोलन में सबसे आगे थे।

    दुर्भाग्य से उनके योगदान को इतिहास के पिछले पन्नों में छिपा दिया गया और अंततः भुला दिया गया।

    आज के इस दिन, मैं भारत के सभी ज्ञात और अज्ञात जनजाति शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करता हूं, विशेष रूप से, ख्वाजा नाईक, वीर बाबुराव शेडमाके, क्रांतिवीर तिलका मांझी, रानी दुर्गावती, क्रांतिवीर नाग्या महादु कातकरी, रानी गाइदिनल्यू, क्रांतिवीर सिद्धू संथाल, क्रांतिवीर टंट्या भिल्ल, कोमारम भीम और अन्य क्रांतिवीरों को नमन करता हूं।

    वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, महाराष्ट्र में आदिवासी जनसंख्या 1 करोड़ से कुछ अधिक है, जो कुल आबादी का 9 से 10 प्रतिशत है।

    राज्य में 45 अनुसूचित जनजातियां हैं जिनमें से कातकरी जैसी कुछ विशेष रूप से कमजोर जनजातियाँ भी शामिल हैं।

    वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य प्राप्त करने के लिए यह अत्यधिक जरूरी है कि हम अपने जनजाति भाइयों और बहनों के जीवन में बदलाव लाएँ।

    मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारत सरकार और प्रदेश सरकार, दोनों आदिवासी भाइयों और बहनों को शिक्षित करने, कौशल प्रदान करने, और सशक्त बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

    महाराष्ट्र का आदिवासी विकास विभाग 1000 से अधिक स्कूल चला रहा है।

    राज्य में 499 सरकारी आश्रम शालाएं और 538 सरकारी सहायता प्राप्त आश्रम शालाएं हैं। यहां 73 ‘नमो स्कूल’ भी हैं जो विज्ञान केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं।

    सुपर-50 ट्रेनिंग कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी छात्रों को J E E और N E E T परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है।

    आज विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी जनजाति छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है।

    ‘मेस्को’ संस्था आदिवासी लड़कों और लड़कियों के लिए प्रशिक्षण केंद्र चला रहा है जहां उन्हें पुलिस बल और सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए तैयार किया जाता है।

    इसी तरह महाराष्ट्र राज्य परिवहन महामंडल जनजाति युवाओं के लिए ड्राईविंग प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है ।

    आदिवासी लड़के-लड़कियों में खेल, साहसिक खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की स्वाभाविक क्षमता है। तीन-चार साल पहले, चंद्रपुर आश्रम शाला के 5 छात्र – छात्राओं ने माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी।

    हमारे जनजाति युवा तीरंदाजी और अन्य खेलों में भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं।

    मुझे खुशी है कि जनजातीय कल्याण आयुक्त खेल साहसिक गतिविधियों में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और प्रशिक्षण के माध्यम से युवा नेतृत्व कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए ‘मिशन शौर्य’ को लागू कर रहे हैं।

    आपको यह जानकर खुशी होगी कि आदिवासी छात्रों को UPSC और MPSC परीक्षाओं के लिए कोचिंग प्रदान की जा रही है। यदि वे UPSC मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं तो उन्हें वित्तीय सहायता भी दी जाती है।

    युवा उद्यमियों को ऋण प्रदान करने के लिए कई सरकारी योजनाएं हैं और मैं चाहता हूं कि सरकार आदिवासियों के बीच इन योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करे।

    आज जनजातीय कला, चित्रकला, मूर्तिकला, लोक गीत, लोक नृत्य की मांग बढ़ रही है।

    मैं आदिवासी लड़के-लड़कियों से अपील करूंगा कि वे अपनी भाषा, कला, नृत्य और संस्कृति को बचाकर रखें। इससे आपको अच्छी आय प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी।

    कई आदिवासियों के पास खेती, रेशम उत्पादन, शहद बनाने आदि का पारंपरिक ज्ञान है।

    आदिवासी उत्पादों और कलाओं का ‘जिओग्रफिकल इंडीकेशन’ हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों को समृद्ध करेगा।

    कृषि प्रसंस्करण एक और क्षेत्र है जो आदिवासी भाई-बहनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना सकता है।

    महाराष्ट्र में जनजातीय समुदायों से कई लेखक और कवि हैं।

    आधुनिक युग में, हमें आदिवासी फिल्म निर्माताओं को बढ़ावा देना होगा जो जनजातीय लोगों की समस्याओं को उजागर करेंगे ताकि उन्हें उचित हस्तक्षेप के माध्यम से संबोधित किया जा सके। जानकर प्रसन्नता हुई कि, T R T I संस्था द्वारा १७ नवंबर के दिन ‘आदिवासी लघुपट महोत्सव’ का भी आयोजन किया गया है।

    अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के कारण लोग अपनी भाषा से दूर जा रहे है। मैं आपसे नई पीढ़ी को मराठी, हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भाषाएं सीखने के साथ अपनी भाषा में बोलने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान करूंगा।

    यदि भाषाएं लुप्त हो गयी तो संस्कृति नष्ट हो जाएगी।

    इसलिए मैं आपसे अपनी अनूठी भाषाओं को हर कीमत पर संरक्षित करने की अपील करता हूं।

    अंत में मैं आदिवासी भाई-बहनों से आह्वान करूंगा कि वे सभी प्रकार के व्यसनों से दूर रहें।

    नशा न सिर्फ आपका जीवन खराब करता है, बल्कि आपके परिवार और समाज को भी कंगाल कर देता है।

    मुझे विश्वास है कि केंद्र और राज्य सरकारों के सामूहिक प्रयासों और आपकी पूरी भागीदारी से जनजातीय भाई-बहन इतिहास की दिशा बदल देंगे और अपनी उपलब्धियों से देश को गौरवान्वित करेंगे।

    आज ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर और जनजातीय महोत्सव प्रदर्शनी देखकर मुझे बहुत खुशी हुई।

    मैं जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं और इस अद्भुत कार्यक्रम के आयोजन के लिए महाराष्ट्र सरकार, आदिवासी विकास विभाग, आदिवासी कल्याण आयुक्त, जनजातीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान और अन्य सभी संस्थाओं की सराहना करता हूं।

    धन्यवाद।
    जय हिन्द।।
    जय महाराष्ट्र। जय जोहार।