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    20.07.2023 : डॉ. होमी भाभा स्टेट यूनिवर्सिटी का दूसरा दीक्षांत समारोह सर कावसजी जहांगीर हॉल, कन्वोकेशन हॉल, फोर्ट, मुंबई

    Publish Date: July 20, 2023

    डॉ. होमी भाभा स्टेट यूनिवर्सिटी का दूसरा दीक्षांत समारोह सर कावसजी जहांगीर हॉल, कन्वोकेशन हॉल, फोर्ट, मुंबई

    आज के दीक्षांत समारोह में उपस्थित

    श्री चंद्रकांत दादा पाटिल, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री

    डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, अध्यक्ष, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर)

    डॉ. राजनीश कामत, कुलपति, डॉ. होमी भाभा स्टेट यूनिवर्सिटी

    प्रो. युवराज मलघे, रजिस्ट्रार

    विश्वविद्यालय के विभिन्न प्राधिकरणों के सदस्य

    विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र

    डिन्स एवं अध्यापक

    स्नातक छात्र – छात्राएं

    अभिभावक

    आमंत्रित बहनों और भाइयों,

    सबसे पहले मैं डॉ होमी भाभा राज्य विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में पीएचडी, स्नातकोत्तर उपाधि, स्नातक उपाधि, स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र प्राप्तकर्ताओं को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

    मैं आपके माता-पिता, भाई-बहनों और अभिभावकों को भी बधाई देता हूं जो आपके साथ खड़े रहे और आपकी डिग्री हासिल करने में आपका साथ दिया।

    आपकी ३ साल, ५ साल, या उससे भी अधिक वर्षो के इस यात्रा के दौरान, कई शिक्षकों ने आपका मार्गदर्शन किया और आपको और भी बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। मैं इस दिन सभी शिक्षकों को विशेष रुप से बधाई देता हूं।

    डॉ होमी भाभा स्टेट यूनिवर्सिटी का जन्म, वर्ष 2019 में हुआ।

    लेकिन यह विश्वविद्यालय निश्चित ही बहुत सौभाग्यशाली है जो इसे मुंबई के कुछ बेहतरीन और सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज विरासत में मिले।

    विश्वविद्यालय से संबद्ध ‘इन्स्टिट्यूट ऑफ सायन्स’, ‘एलफिंस्टन कॉलेज’ और ‘सिडेनहैम कॉलेज’ शताब्दी पूरे करने वाले जानेमाने कॉलेजेस है। तीनो कॉलेज के पूर्व छात्रों की सूची गौरवशाली है।

    मुझे नहीं लगता हमारे देश में कोई विश्वविद्यालय होगा, जो दादाभाई नौरोजी, उद्योगपति जमशेदजी टाटा, लोकमान्य तिलक, भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर, भारत रत्न महर्षि कर्वे, वैज्ञानिक डॉ होमी भाभा, रँग्लर वी वी नारलीकर, डॉ. एम. जी. के. मेनन, प्रोफेसर मधु दंडवते, पद्मभूषण माधव गाडगील जैसे पूर्व छात्रों पर गर्व कर सकता है।

    प्रसिद्ध बैंकर दीपक पारेख और उदय कोटक, जम्मू – कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला, उद्योग रत्न कुमार मंगलम बिड़ला जैसे पूर्व विद्यार्थी होने का दावा और कौन से विश्वविद्यालय कर सकते हैं।

    विश्वविद्यालय द्वारा अपनी लंबी और विशिष्ट विरासत को आगे बढ़ाना और समाज में योगदान के माध्यम से अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखना अपने आप में एक चुनौती है।

    प्रिय स्नातक छात्रों,

    आज का दिन आपके जीवन में एक महत्वपूर्ण दिन है। लेकिन मैं याद दिलाऊंगा कि दीक्षांत समारोह एक लंबी यात्रा की शुरुआत मात्र है।

    फिर भी, इस मुकाम तक पहुंचना अपने आप में एक अहम उपलब्धि है। लगन, प्रतिबद्धता, दृढ़ता, सीखने के लिए खुले दिमाग जैसी व्यक्तिगत दक्षताएं जो आपको यहां तक ले आईं, वे आपके पूरे जीवन में महत्वपूर्ण रहेंगी। उनका पालन-पोषण करें।

    जिस जमाने में हम बड़े हुए, दुनिया बिल्कुल अलग थी। करियर के विकल्प सीमित थे। कई लोग आगे चलकर शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर बनते थे।

    कानून एक प्रतिष्ठित पेशा माना जाता था। मुझ जैसे कुछ लोग राजनीति में शामिल हुए।

    मित्रों, उन दिनों दुनिया बिल्कुल सीधी-सरल थी। नौकरियाँ सुरक्षित थीं। एक बार लोग नौकरी लग जाते, तो वे आम तौर पर उसी संगठन से सेवानिवृत्त हो जाते थे। नियोक्ता के प्रति निष्ठा एक महान गुण माना जाता था।

    आपको ऐसे कई लोग मिलेंगे जो आंखों में गर्व भरकर आपको बताएंगे कि उन्होंने 35 साल तक एक ही संस्था में नौकरी की।

    लोग सरकारी नौकरी को सबसे सुरक्षित नौकरी मानते थे।

    आज हमारे समाज में आमूल-चूल परिवर्तन आ रहा है। हम एक चुनौतीपूर्ण समाज की ओर बढ़ रहे हैं।

    नौकरियाँ कम हो रही हैं। नौकरियां अब सुरक्षित नहीं हैं। आपके परफॉर्मन्स का मूल्यांकन सालाना नहीं बल्कि मासिक और यहां तक कि केस टू केस के आधार पर किया जाता है।

    पहले हम इतने वर्षों तक जिस शिक्षा नीति का पालन करते थे, वह मोटे रूप से ब्रिटिश शासकों द्वारा हमें नौकर बनाए रखने के लिए बनाई गई थी।

    प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता और नेतृत्व की वजह से, हमने देश में पहली बार एक ऐसी शिक्षा नीति पेश की है जो उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान, रचनात्मक सोच और महत्वपूर्ण चिंतन पर जोर देती है।

    आप जिस नये समाज में कदम रख रहे हैं वह एक उद्यमशील समाज है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर कोई उद्यमी है। लेकिन इसका मतलब यह है कि आप जहां भी खड़े हों या नौकरी करते हों, आपको उद्यमशीलता की भावना से काम करना होगा। आपको एक टीम लीडर, एक प्रर्वतक और अपने भाग्य का निर्माता स्वयं बनना होगा।

    एक प्रसिद्ध मॅनेजमेंट गुरु ने कहा है कि, ‘आप बदलाव का प्रबंधन नहीं कर सकते, आपको इससे आगे निकलना होगा’। आपके पास एक नई दुनिया के वास्तुकार और निर्माता बनने का अवसर है।
    सरकारी नौकरियाँ कम हो रही हैं, मशीनीकरण बढ रहा है।

    निजी क्षेत्र में नौकरियां कम हो रही है।

    उद्यमिता विकास की कुंजी है। अवसर हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं।

    कई देश कुशल जनशक्ति की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आज भारत की ओर देख रहे हैं।

    जर्मनी, इटली जैसे देश और उम्रदराज़ जनसंख्या वाले कई अन्य देश उम्मीद कर रहे हैं कि भारत जैसा युवा देश इस अवसर पर आगे आएगा और कुशल नौकरियों की उनकी आवश्यकताओं को पूरा करेगा।

    आज समय आया है जब पूरी दुनिया हमारा कार्यस्थल बने। अपने आप को केवल मुंबई या महाराष्ट्र तक ही सीमित न रखें। भारत के किसी भी राज्य और दुनिया के किसी भी छोर तक जाने के लिये तैयार हो जाइए ।

    डॉ. होमी भाभा राज्य विश्वविद्यालय भाग्यशाली है कि उनके पास अपना स्वयं का शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज है। हालांकि मैंने देखा कि इस वर्ष केवल 27 बी.एड. स्नातक उत्तीर्ण हुए हैं।

    भारत में पूरी दुनिया के लिए शिक्षक पैदा करने की क्षमता है।

    हमारे पास जनशक्ति और प्रतिभा है।

    हमें शिक्षक प्रशिक्षण क्षेत्र में और अधिक छात्रों को आकर्षित करके विश्व के लिये अधिक शिक्षक तैयार करने चाहिए।

    दुनिया भर के विश्वविद्यालय छात्रों को आकर्षित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में अमेरिका के मिसौरी के सेंट लुईस विश्वविद्यालय के प्रोवोस्ट ने मुझसे मुलाकात की। यह एक निजी विश्वविद्यालय है।
    उन्हें छात्रों को आकर्षित करने और बनाए रखने तथा अपना वेतन अर्जित करने के लिए बहुत प्रयास करने पड़ते हैं।

    मुझे लगता है कि हमें छात्रों को आकर्षित करने और बनाए रखने की उनकी भावना को आत्मसात करना चाहिए।

    प्रिय शिक्षकों और डीन,

    ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, एक हजार साल से अधिक पुरानी है, कैंब्रिज भी 900 साल पुराना है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय का निर्माण सन 1636 में हुआ था। इन विश्वविद्यालयों की महानता सर्वोत्तम परंपराओं और प्रथाओं को बनाए रखने और बरकरार रखने की उनकी क्षमता में निहित है।

    उनकी सफलता समय के साथ विकसित होने में निहित है। उनकी सफलता ऐसे पाठ्यक्रमों की पेशकश करने में निहित है जो समय से आगे हैं। उनकी सफलता अपने स्नातकों के बीच आलोचनात्मक सोच और नेतृत्व गुणों को विकसित करने में हैं। यह वही है जिसकी हमें आवश्यकता है और हम चाहते हैं।

    उम्र का अपना एक फायदा जरूर होता है। लेकिन, महत्वपूर्ण बात यह है कि छात्रों को सर्वोत्तम शिक्षण अनुभव प्रदान किया जाए। महत्वपूर्ण बात यह है कि उनमें शोध, पुनर्शोध, नवाचार और आलोचनात्मक सोच की प्रवृत्ति विकसित की जाए।

    सर्वोत्तम विश्वविद्यालयों के बारे में एक अच्छी बात जो मैंने देखी है वह है उनसे जुड़े संकाय की गुणवत्ता। कुछ महानतम वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, लेखक, इतिहासकार और नोबेल पुरस्कार विजेता भी महान विश्वविद्यालयों से जुड़े हुए हैं।

    मुंबई शहर महानतम उद्योगपतियों, महानतम गायकों, कलाकारों, व्यापारिक नेताओं, प्रदर्शन करने वाले कलाकारों आदि का घर है। विश्वविद्यालय को नियमित रूप से उन्हें आमंत्रित करना चाहिए और विश्वविद्यालय के कामकाज में शामिल करना चाहिए।

    विश्वविद्यालय को अपना पूर्व छात्र संघ बनाना चाहिए और पूर्व छात्रों को निदेशक, संरक्षक और यहां तक कि शिक्षक के रूप में भी शामिल करना चाहिए।

    अंग्रेजी मे कहते है, ‘स्माल इज ब्यूटीफुल’। इस विश्वविद्यालय की ताकत इसका छोटा आकार है। इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में, मुझे आपसे सबसे अधिक उम्मीदें हैं।

    मैं आपसे अच्छे अकादमिक सलाहकारों से संपर्क करने की अपील करूंगा। अपनी ताकत और कमजोरियों को पहचानें और कमियों को दूर करने का प्रयास करें।

    मेरा विश्वास है, और मैं चाहता हूं कि आप भारत के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में शामिल होने की आकांक्षा रखें।

    मैं स्नातक छात्रों को बधाई देता हूं और उनमें से प्रत्येक को उनकी आगे की यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

    चुनौतियों को स्वीकार करें और बदलाव से आगे बढ़ें। जीवन के उद्देश्य को समझना और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीना महत्वपूर्ण है।

    मैं चाहता हूं कि आप भविष्य के निर्माता बनें। मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं।

    धन्यवाद।
    जय हिन्द। जय महाराष्ट्र।।