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    11.08.2023 : टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान और ICCSA फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘लैंडफिल और वेस्ट से मीथेन उत्सर्जन’ विषय पर संगोष्ठी

    Publish Date: August 11, 2023

    टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान और ICCSA फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘लैंडफिल और वेस्ट से मीथेन उत्सर्जन’ विषय पर संगोष्ठी, स्थान: टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, देवनार, मुंबई, दिनांक ११ ऑगस्ट २०२३

    डॉ. शालिनी भारत, निदेशक तथा कुलपती, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान

    डॉ. अनिल अग्निहोत्री, रिटायर्ड जनरल मॅनेजर, ONGC

    डॉ. जे एस शर्मा, निदेशक, ICCSA फाउंडेशन

    प्रो. बिनो पॉल, प्रो वाईस चाईसलर, TISS

    डॉ. राकेश कुमार, OSD, CSIR

    उद्योग, शिक्षा, प्रशासन, अनुसंधान क्षेत्र से आये गणमान्य अतिथि

    टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान के छात्र छात्राएं,

    मुझे ‘लैंडफिल और वेस्ट से मीथेन उत्सर्जन’ इस विषय पर आयोजित संगोष्ठी के अवसर पर टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान में आकर हर्ष का अनुभव हो रहा है।

    इस संगोष्ठी के आयोजन के लिए मैं टाटा समाज विज्ञान संस्था और ICCSA फाउंडेशन को हार्दिक बधाई देता हूं।

    चार दिन पहले ही मैंने ‘जमशेदजी टाटा: विज्ञान को बढावा देने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायक’ विषय पर आयोजित चर्चा में भाग लिया था।

    जैसा कि ज्ञात है कि जमशेदजी टाटा ने बैंगलोर में भारतीय विज्ञान संस्थान की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    यह जानकर और भी खुशी हुई कि टाटा समाज विज्ञान संस्थान के निर्माण में भी टाटा परिवार का पूर्ण सहयोग रहा है।

    गर्व की बात है कि आज TISS संस्थान पूरे देश में सामाजिक विज्ञान के शीर्ष संस्थानों में गिना जाता है। इसका श्रेय संस्था के संस्थापकों, निदेशकों, पूर्व छात्रों और शिक्षकों को जाता है।

    TISS की उंची शैक्षणिक परंपराओं को बनाए रखने, और राष्ट्र के लिए निरंतर योगदान के लिए, मै निदेशक डॉ. शालिनी भारत, संकाय सदस्यों और आप में से प्रत्येक का अभिनंदन करता हूं।

    पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में मुझे पर्यावरण और वन मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में कार्य करने का अवसर मिला था । इसलिये ‘ग्लोबल वॉर्मिंग और क्लायमेट चेंज’ विषय से मैं भली भांति परिचित हूं।

    एक समय था जब लगता था कि, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का विषय भारत से बहुत दूर है।

    लेकिन, आज जलवायु परिवर्तन हमारे द्वार पर दस्तक दे रहा है। भारत में, महाराष्ट्र में, और यहां तक कि मुंबई में भी, हम ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव का अनुभव कर रहे हैं।

    महाराष्ट्र में बाढ़, भूस्खलन और सूखे की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस वर्ष हिमाचल प्रदेश में 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए, साठ घंटे की लगातार बारिश हुई जिससे पुल, सड़कें, राष्ट्रीय राजमार्ग, इमारतें और वाहन बह गए और अपने पीछे भारी तबाही का सिलसिला छोड़ गए।

    माननीय प्रधान मंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में, राष्ट्र ने शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता जताई है। माननीय प्रधान मंत्री ने जलवायु परिवर्तन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को ‘पर्यावरण के लिए जीवन शैली’ (LiFE) को मंत्र के रूप में अपनाने का सुझाव दिया है।

    आज के इस संगोष्ठी का उद्देश्य मीथेन उत्सर्जन के प्रमुख मुद्दे को संबोधित करना है, जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार, एक हानिकारक ग्रीनहाउस गैस है।

    आज पूरे विश्व में शहरों की जनसंख्या ग्रामीण जनसंख्या से अधिक हो चुकी है। शहर बढ़ रहे हैं। शहरीकरण के साथ आवास, जल तथा ऊर्जा आपूर्ती, स्वच्छता, सेनिटेशन और सॉलिड वेस्ट प्रबंधन जैसी समस्याएं निर्माण हो रही हैं।

    अकेले मुंबई में प्रत्येक दिन, हजारों मीट्रिक टन सॉलिड वेस्ट उत्पन्न होती है, जिसका प्रबंधन एक विकट चुनौती पेश करता है।

    मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के बाद दूसरी सबसे प्रचुर ग्रीनहाउस गैस है, जो वायुमंडल को गर्म करने में CO2 से 28 गुना अधिक शक्तिशाली है।

    विश्व स्तर पर लगभग 50% मीथेन उत्सर्जन मानवीय गतिविधियों के कारण होता है, मुख्यतः कृषि, अपशिष्ट और जीवाश्म ईंधन उत्पादन और खपत से।

    लैंडफिल, मीथेन उत्सर्जन के प्राथमिक स्रोतों में से एक है, और यह जरूरी है कि हम इस मुद्दे के समाधान के लिए सक्रिय उपाय करें।

    यह आवश्यक है कि हम अपना ध्यान केवल सॉलिड वेस्ट मेनेजमेंट से हटाकर टिकाऊ प्रथाओं को अपनाने पर केंद्रित करें जो हमारे कार्बन उत्सर्जन को कम करें और हमारे पर्यावरण की रक्षा करें।

    प्रत्येक नागरिक और समुदाय इस कार्य में हितधारक हैं। हममें से हर कोई इस चुनौती से निपटने में अपनी भूमिका निभा सकता है। हममें से प्रत्येक को अपनी दैनिक गतिविधियों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने का प्रयास करना चाहिए।

    पर्यावरण के लिए वन की संरक्षण जरुरी है। देखने में आता है, कई फैक्टरीयां दूषित पानी को सीधे नदी में डाल रहे है; जिससे नदी का पानी दूषित हो रहा| नदी नालों में बदल रहे है। इधर भी ध्यान देने की जरुरत है।

    हम निश्चित रूप से सॉलिड वेस्ट सेग्रेगेषन करने के उद्देश्य से नगर निगम के प्रयासों में मदद कर सकते हैं।

    हम गैर विघटित प्लास्टिक बैग के उपयोग को भी कम कर सकते हैं।

    हमारे देश में अन्न को पूर्ण ब्रह्म कहा गया है | हम भोजन की हानि और बर्बादी को कम करना तो अवश्य कर ही सकते है।

    दीर्घकालिक समाधान के रूप में हम शहरों में भीड़भाड़ कम कर सकते है।

    यह तब होगा जब हम ग्रामीण क्षेत्रो मे समृद्धि ला सके।

    यदि हम ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यम और नौकरियों के माध्यम से समृद्धि पैदा कर सकें, तो हमारे शहरों में भीड़ कम हो जाएगी।

    मीथेन उत्सर्जन की चुनौती से निपटने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी ‘मास्टर की’ है। सूक्ष्म जीव शास्त्र से भी हमें इसमे मदद हो सकती है।

    कभी-कभी समाधान सबसे अप्रत्याशित क्षेत्रों से आते हैं।

    15-20 साल पहले हमें एसटीडी और आईएसडी फोन कॉल करने में काफी खर्च करना पड़ता था।

    आज आप दुनिया के किसी भी छोर में व्हाट्सएप कॉल के जरिए बिल्कुल मुफ्त में कॉल कर सकते हैं।

    मैं टीआईएसएस और आईसीसीएसए फाउंडेशन से आग्रह करूंगा कि वे अन्य देशों द्वारा सॉलिड वेस्ट, लैंडफिल और मीथेन उत्सर्जन की समस्या का प्रबंधन करने के तरीकों का अध्ययन करें।

    हमें उनके समाधानों की नकल करने की आवश्यकता नहीं है। हमें स्वयं विज्ञान और तंत्रज्ञान में विकसित होना चाहिए और दुनिया को इन समस्याओं का किफायती समाधान देना चाहिए।

    हम भाग्यशाली हैं कि आज यहां विशेषज्ञ, शोधकर्ता और नीति निर्माता एकत्र हुए हैं।

    हमें स्थायी समाधान खोजने के लिए उद्योगों, शिक्षाविदों और समाज के बीच साझेदारी की आवश्यकता है, जो न केवल मीथेन उत्सर्जन को कम करे बल्कि हमारे नागरिकों के लिए एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण भी बनाए।

    मुझे इस बात की भी खुशी है कि सम्मेलन आयोजकों ने वैश्विक ज्ञान प्राप्त करने के उद्देश्य से ‘अंतर्राष्ट्रीय मीथेन परिषद’ लॉन्च करने का प्रस्ताव रखा है।

    मुझे विश्वास है कि आज की संगोष्ठी छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी और उन्हें अपने कैरियर के लक्ष्यों के बारे में सोचने और साझा करने में मदद मिलेगी।

    आज के इस महत्वपूर्ण विषय पर संगोष्ठी आयोजित करने के लिए TISS और ICCSA टीम को एक बार पुन: धन्यवाद देता हूं।

    धन्यवाद
    जय हिंद। जय महाराष्ट्र।।