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    01.07.2023 : सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय का १२२ वाँ दीक्षांत समारोह

    Publish Date: July 1, 2023

    सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय का १२२ वाँ दीक्षांत समारोह

    विद्या विनयेन शोभते ॥
    ‍विद्या विनय से शोभा देती है ॥

    श्री चंद्रकांत दादा पाटील जी, उच्च व तंत्र शिक्षण मंत्री

    प्रा. डॉ. राजेश गोखले जी, केंद्रीय विज्ञान व तंत्रज्ञान मंत्रालय के जैवतंत्रज्ञान विभाग के सचिव

    श्री. सुरेश गोसावी जी, कुलपति, सावित्री बाई फुले विश्वविद्यालय

    डॉ. प्रफुल्ल पवार जी, कुलसचिव

    डॉ. महेश काकडे, संचालक, परीक्षा मंडल

    कार्यकारी परिषद और विद्या परिषद के सदस्य,

    स्नातक छात्र-छात्राएं और उनके माता-पिता,

    आमंत्रित अतिथि गण,

    शिक्षक और कर्मचारी गण,

    प्रबंधन, सिनेट और अकादमिक परिषद के सदस्य

    मीडियाकर्मी

    देवियों और सज्जनों,

    मैं सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आप सभी का हार्दिक अभिनंदन करते हुए अत्यंत हर्ष का अनुभव कर रहा हूँ।

    इस अवसर पर आप सभी को बधाई देता हूं और स्वर्ण पदक विजेता छात्रों का विशेष अभिनंदन करता हूं।

    सभी छात्र-छात्राओं के माता पिता, अध्यापक तथा अभिभावकों का भी हार्दिक अभिनंदन करता हॅूं।

    पिछले कुछ दशकों में, पुणे शहर ने भारत में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और साथ ही उच्च शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में ख्याति प्राप्त की है।

    मैं पुणे के इस शहर में “पूर्व का ऑक्सफोर्ड” माने जाने वाले इस विश्वविद्यालय में भाग लेकर बहुत खुश हूं।

    आज राज्य कृषि दिवस और राष्ट्रीय चिकीत्सक दिवस भी है। कोविड काल में मेरे किसान भाई-बहनों ने तथा डाक्टरों एवं उनके पूरे टीम ने उच्च कोटि का कार्य किया है। उसके लिए मेरे किसान भाई-बहनों तथा डाक्टरों व उनकी टीम को बधाई देता हूँ तथा उनके परिवार वालों को शुभकामनाए देता हूँ।

    प्रिय विद्यार्थी मित्रों,

    आप सभी जानते ही हैं कि ज्ञान सृजन के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, की परंपरा का पूरा भारत सम्मान करता है।

    मुझे खुशी है कि आज के स्नातक उस परंपरा को जारी रखने के लिए काम कर रहे हैं।

    मुझे यह जानकर आंनद हुआ क‍ि सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की स्थापना 10 फरवरी, 1949 को हुई थी और इस वर्ष विश्वविद्यालय अपने “अमृतमहोत्‍सवी वर्ष” में प्रवेश कर रहा है।

    मुझे बताया गया कि विश्वविद्यालय की विगत 75 वर्षों की गौरवशाली प्रगति का इतिहास संकलित किया जा रहा है और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भविष्य की योजनाएँ बनाई जा रही हैं।

    आज के 122 वें दीक्षांत समारोह में 1,21,281 छात्रों को डिग्री और डिप्लोमा प्रदान किए जा रहे हैं। मुझे विशेष ख़ुशी है कि 70 विद्यार्थियों को ‘स्वर्ण पदक’ से सम्मानित किया जा रहा है जिनमें लड़कियों की संख्या अधिक है।

    पुणे जिला, सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का केंद्र है। यह ऑटोमोबाइल उद्योग और अन्य संबंधित उद्योगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसका उपयोग छात्रों के विकास के लिए कैसे किया जा सकता है, इस पर विश्वविद्यालय को लगातार परियोजनाये बनानी चाहिए।

    हमारे पाठ्यक्रम को बदलती औद्योगिक प्रौद्योगिकियों, रोबोटिक्स, नैनो कंप्यूटरों के साथ तालमेल बनाना होगा। आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा हासिल करने के लिए आर्टिफिशल इन्टीलेजन्स (AI) का उपयोग अपनाया जा रहा है। हमारे छात्रों को समसामयिक आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्यक्रम में गतिशील परिवर्तन करके विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया जाना चाहिए।

    विद्यार्थी मित्रों,

    आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा युवा देश बन रहा है। भारत में पूरी दुनिया को जनशक्ति आपूर्ति करने की क्षमता है।

    भारत की सांस्कृतिक विविधता, विश्व गुरु बनने की उसकी क्षमता, विश्व का नेतृत्व करने की उसकी शक्ति और विश्व के सबसे युवा देश के रूप में उसकी प्रतिष्ठा सार्वभौमिक है। हम माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार हैं।

    विश्वविद्यालय के पास देश के सामाजिक युवा वर्ग की एक फौज है। विश्वविद्यालय कल के नीति निर्माताओं को आकार दे रहा है। ये वे युवा हैं जो निकट भविष्य में भारत का नेतृत्व करने वाले हैं। इसलिए विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है। यह गर्व की बात है कि विश्वविद्यालय इस ऐतिहासिक और वैश्विक आयोजन में योगदान दे रहा है। जी-20 शिखर सम्मेलन के मौके पर दुनिया भर से विदेशी नागरिक भारत आ रहे हैं। वे विचारों का आदान-प्रदान कर रहे हैं. इसलिए यह विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक वैश्विक यात्रा है।

    गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उद्देश्य इक्कीसवीं सदी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अच्छी सोच के साथ एक सर्वांगीण और रचनात्मक व्यक्तित्व का विकास होना चाहिए। एक व्यक्ति को विशेष रुचि के एक या कई क्षेत्रों में गहराई से अध्ययन करने में सक्षम होना चाहिए। साथ ही, चारित्र्य, नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों, बौद्धिक जिज्ञासा, वैज्ञानिकता, रचनात्मकता और सेवा भावना के साथ-साथ विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला मानव विज्ञान एवं भाषा के साथ-साथ तकनीकी और अन्य क्षेत्रों में अवसर खोजने की क्षमता विकसित होनी चाहिए।

    उच्च शिक्षा को व्यक्तिगत सफलता, सार्वजनिक सहभागिता और समाज में उत्पादक योगदान की ओर ले जाना चाहिए। छात्रों को अधिक सार्थक जीवन और कार्य करने के लिए तैयार रहना चाहिए तथा वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए सशक्त होना चाहिए।

    व्यक्ति के समग्र विकास के लिए प्री-स्कूल स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक, हर स्तर पर निर्धारित कौशल और मूल्यों का समावेश आवश्यक है। मुझे विश्वास है कि आज विश्वविद्यालय इस जिम्मेदारी और अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा।

    उच्च शिक्षा में सामाजिक स्तर पर एक बौद्धिक और कुशल राष्ट्र का निर्माण करने की क्षमता है। एक ऐसा राष्ट्र जो अपनी समस्याओं का स्वयं समाधान खोज उसे कार्यान्वित कर सकता है। उच्च शिक्षा ज्ञान निर्माण कर और नवाचार कर बढ़ती राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकती है। इसलिए, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का उद्देश्य बेहतर रोजगार के अवसर पैदा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा एक जीवंत, सामाजिक रूप से संलग्न, सहयोगी समुदाय और एक समृद्ध राष्ट्र बनाने की कुंजी है।

    कई शिक्षाविदों का यह मानना हैं कि नई शिक्षा प्रणाली के आधार पर भारत विश्व महाशक्ति बन सकता है। इसमें सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की बड़ी भूमिका है। यह उचित है कि इस उत्तरदायित्व की चेतना को वास्तविक क्रियाकलाप के माध्यम से पूर्ण किया जाना चाहिए। यह बहुत अच्छी बात है कि विश्वविद्यालय विभिन्न योजनाओं के साथ-साथ उसके अनुसार क्रियान्वयन के प्रति भी सजग है।

    नई शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है। जहाँ उच्च शिक्षा की उपयोगिता बढ़ रही है, वहीं देश की प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा में रचनात्मक हस्तक्षेप की भी आवश्यकता है। विश्वविद्यालय के विभागों और संबद्ध कॉलेजों में संकाय को अधिक संवेदनशील होना चाहिए और पाठ्यक्रम एवं नई शिक्षा नीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अब समय आ गया है कि राज्य और केंद्र सरकारें शिक्षा की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लें। उस अवसर की खोज और भागीदारी ने पिछले साढ़े चार वर्षों में आकार लिया है, लेकिन इसमें रफ्तार लाने की जरूरत है।

    प्यारे विद्यार्थियों,

    मुझे बताया गया कि महाराष्ट्र की सुपुत्री तथा भारत देश की प्रथम भूतपूर्व महिला राष्ट्रपती महोदया श्रीमती प्रतिभाताई पाटील, भूतपूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह, महाराष्ट्र के भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री शरद पवार, महाराष्ट्र के भूतपूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, पद्मश्री डॉ. साइरस पूनावाला भी इसी विश्वविद्यालय के स्नातक थे।

    आज आप सबको जो उपाधियां मिली हैं, वे आपकी कड़ी मेहनत और शिक्षा के प्रति आपके समर्पण एवं प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं। मुझे विश्वास है कि आप सबने जो ज्ञान और कौशल्य अर्जित किया है, वह आपके लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक होगा और देश और समाज के उत्थान के लिए इसका उपयोग अवश्य करेंगे।

    इस विश्वविद्यालय का बोध वाक्य ही है कि
    यः क्रियावान् स पण्डितः

    याने जो पर‍िश्रम करता है, वही विद्वान होता है।

    इन्ही शब्दों के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हॅूं और आपको आपके सुनहरे भविष्य के लिए फिर से शुभकामनाएं देता हॅूं।

    जय हिंद। जय महाराष्ट्र।।